Saturday, 2 September 2017

भविष्य में निर्धारित महत्वपूर्ण आयोजन (Important Future Events)

भविष्य में निर्धारित महत्वपूर्ण आयोजन (Important Future Events)

अन्तर्राष्ट्रीय

आर्थिकी/व्यापार

‘‘री-इन्‍वेस्‍ट, 2017’’ के नाम से नवीकरणीय ऊर्जा वैश्विक निवेश सम्‍मेलन ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर में 7 से 9 दिसंबर 2017 को आयोजित किया जाएगा।

11th Ministerial Conference (MC) of WTO to be held in Buenos Aires (Argentina) in December 2017.
दिसंबर 2017 में ब्यूनस आयर्स में विश्व व्यापार संगठन का 11वां मंत्रिस्तरीय सम्मेलन

खेल

वर्ष 2019 में राष्ट्रमंडल भारोत्तोलन चैम्पियनशिप का मेजबान - भारत

Next three Olympic Games to be held in 2020 (Tokyo), 2024 (Paris) and 2028 (Los Angeles).

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना Pradhan Mantri Matru Vandana Yojana (PMMVY)

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना Pradhan Mantri Matru Vandana Yojana (PMMVY)

प्रधान मंत्री मातृत्व वंदना योजना (PMMVY) मातृत्व सहयोग योजना का बदला हुआ नाम है, जिसके अंतर्गत सरकार पहले जीवित बच्चे के जन्म के लिए गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को 6000 रुपये की सहायता प्रदान करती है।

महत्वपूर्ण दिवस/सप्ताह (Important Days/Week)

महत्वपूर्ण दिवस/सप्ताह (Important Days/Week) (1 सितम्बर 2017 से अद्दतन)

अंतर्राष्ट्रीय

शांति और विकास के लिए विश्व विज्ञान दिवस: 10 नवंबर
थीम: साइंस फॉर ग्लोबल अंडरस्टैंडिंग

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस - 08 सितम्बर
विषय (थीम): ‘डिजिटल दुनिया में साक्षरता
वर्ष 2017 के लिए यूनेस्‍को द्वारा घोषित

राष्ट्रीय

1918 में इजराइल में लड़े गए “हैफा के युद्ध” में भारतीय सैनिको के योगदान की याद में इस दिन को हैफा दिवस के रूप में मनाया जाता है – सितम्बर 23

हिमालय दिवस -  09 सितम्बर

National Nutrition Week - 1st to 7th September
Theme (2017)  - Optimal Infant & Young Child Feeding Practices: Better Child Health

नवीनतम नियुक्तियां ( RECENT APPOINTMENTS )

नवीनतम नियुक्तियां
APPOINTMENTS (1 सितम्बर 2017 से अद्दतन)

अन्तर्राष्ट्रीय

भारत में अमेरिका का राजदूत - केनेथ जस्टर

राष्ट्रीय

पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो का महानिदेशक -  एपी महेश्वरी

भारी जल बोर्ड का अध्यक्ष - परमाणु वैज्ञानिक यू कामाची मुदली

केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की अध्यक्ष - अनीता करवाल

राष्ट्रीय कौशल विकास एजेंसी का महानिदेशक  -  राजेश कुमार चतुर्वेदी

Chairman and Managing Director (CMD) of National Mineral Development Corporation (NMDC) - N Baijendra Kumar

प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया का अध्यक्ष - विवेक गोयनका

राष्ट्रीय रासायनिक हथियार समझौता प्राधिकरण (एनएसीडब्ल्यूसी) का अध्यक्ष - डॉ. इन्द्र जीत सिंह

Chairperson of Central Board of Secondary Education (CBSE) - Anita Karwal

रेलवे सुरक्षा बल का महानिदेशक - धर्मेन्द्र कुमार

रेलवे बोर्ड चेयरमैन - अश्विनी लोहानी

एयर इंडिया चेयरमैन - राजीव बंसल

वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग में नए सचिव - राजीव कुमार

केंद्रीय गृह सचिव - राजीव गौबा

निति आयोग उपाध्यक्ष - राजीव कुमार
NITI Aayog Vice Chairman - Rajiv Kumar

कैग - राजीव महर्षि
Comptroller and Auditor General (CAG) of India - Rajiv Mehrishi

Election Commissioner - Sunil Arora
चुनाव आयुक्त - सुनील अरोड़ा

Friday, 4 August 2017

असहमति और देशद्रोह

असहमति देशद्रोह नहीं है, लोकतंत्र का सार है।

हमारी विरासत एक रंग-बिरंगी चादर जैसी है, जिसे हम भारत कह सकते हैं, और हम अलग-अलग रंगों से बुनी इस चादर की विविधता की कद्र करते हैं।

“अनेकता में एकता” भारतीय समाज की महत्त्वपूर्ण विशेषता है। यह वाक्यांश इस बात का भी सूचक है कि भारत किस प्रकार से विविधतापूर्ण संस्कृति, सामाजिक और जातीय तत्त्वों को अपनाते हुए निरंतर आगे बढ़ रहा है। यहाँ अपनी पहचान को अक्षुण्ण रखकर विविधता को अंगीकार करने की आज़ादी है।

कुछ विभाजनकारी ताकतों की नाकाम कोशिशों, सामुदायिक झड़प और नफरत फैलाने जैसी गिनी-चुनी घटनाओं को छोड़ दें तो ऐसे उदाहरण कम ही देखने को मिलते हैं जिसके परिणामस्वरूप भारत की विविधता पर आँच आई हो। उल्लेखनीय है कि जब ऐसी शक्तियों ने करवट लेने की कोशिश की है जिससे कि भारत की एकता और अखंडता पर संकट आए तो इसका मुखर प्रतिरोध समाज, सरकार, न्यायपालिका, सिविल सोसाइटी आदि के द्वारा किया गया।

इस तरह विविधता भारत की एक अमूल्य संपदा है जो भारत को निम्नलिखित रूप से सशक्त बनाती है।

यह किसी एक भाषा, संस्कृति, रीति-रिवाज आदि को प्रभावशाली होने से रोकती है और गंगा-जमुनी तहज़ीब को जीवंत बनाए रखती है।

यह समाज में सकारात्मक स्पर्द्धा को जन्म देती है, जो समाज को सतत् रूप से विकास करने की प्रेरणा प्रदान करती है।

इससे विभिन्न संस्कृतियों का समावेश होता है जिससे बंधुता की भावना को बल मिलता है।
निजता या व्यक्तिगत स्वंत्रता का अधिकार से सृजनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा मिलता है।

यद्यपि भारत मामूली स्तर पर बड़े और छोटे धार्मिक समुदायों के बीच अंतर का सामना कर रहा है। फिर भी भारत की अधिकांश आबादी यहाँ की विविधता का मज़ा लेते हुए खुशीपूर्वक जीवन व्यतीत कर रही हैं।

विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवोन्मेष नीति, 2013 ( Science, Technology and Innovation Policy 2013)

विज़न 

तीव्र धारणीय एवं समावेशी विकास के लिए विज्ञान चालित समाधानों की खोज को बढ़ाना।

उद्देश्य

भारत को शीर्ष पांच वैश्विक वैज्ञानिक शक्ति वाले देशों की सूची में शामिल करना।

प्रासंगिकता/उपादेयता

आज विज्ञान विकास एवं प्रगति का अहम् साधन है। दुनिया के विकसित देशों ने विज्ञान एवं तकनीकी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करके ही वैश्विक धाक जमाई है। किन्तु आजा़दी के 70 वर्षों बाद भी भारत पिछड़ा हुआ है, नतीजतन परावलम्बी है। यही वजह है कि हम गरीबी, भुखमरी, असमानता, अशिक्षा, बिमारी और शोषण से मुक्त नहीं हो पा रहे हैं। हमारे देश में विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रतिष्ठानों में सरकार का प्रभुत्व है और दुनिया भर में ज्यादातर सरकारी इकाईयों की तरह ही उसमें जोखिम लेने की कार्य संस्कृति तथा नवोन्मेष का अभाव बना हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मैसूर में 103वीं विज्ञान कांग्रेस का उद्घाटन करते हुए कहा - "सुशासन केवल नीतियां बनाना और निर्णय लेना मात्र नही हैं, बल्कि सुशासन विज्ञान और प्रौद्योगिकी को जोड़कर विकल्प पेश करने और रणनीति तैयार करने की व्यवस्था है।"  प्रधानमंत्री ने पांच - ई (Five Es) पर फोकस किया है-  अर्थव्यवस्था (Economy), पर्यावरण (Environment), ऊर्जा (Energy), संवेदना (Empathy), तथा समानता (Equality)। साथ ही नवोन्मेष को रेखांकित करते हुए वैज्ञानिकों से अपील की है कि वे पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक ज्ञान के बीच की खाई को खत्म करें जिससे कि चुनौतियों के स्थानीय और अधिक स्थायी समाधान खोजे जा सकें। चूंकि वर्तमान भारत के ग्रामीण क्षेत्रों से आ रहे नए - नए आविष्कारों ने न केवल भारत में बल्कि विश्व मंच पर भी अपना लोहा मनवाया है। यदि इन प्रतिभाओं की रचनात्मकता को भी मान्यता मिलती है तो स्थानीय स्तर पर जरूरतों के हिसाब से उपकरणों के निर्माण का सिलसिला तेज हो सकता है। अतः विज्ञान नीति को गांव और ग्रामीण आविष्कारों से जोड़ने की अत्यन्त जरूरत है तभी भारत में विकास की गूंज चहुंओर सुनाई देगी।

Thursday, 3 August 2017

पृथ्वी का भविष्य : प्लास्टिक प्लानेट (Plastic Planet)

हम बहुत तेजी से 'प्लास्टिक प्लानेट' बनने की ओर अग्रसर हैं।
एक आंकड़े के मुताबिक अब तक बनाए गए प्लास्टिक की कुल मात्रा 8.3 अरब टन बताई है।
यह ऐसा मटीरियल है जो बीते 65 सालों में बड़ी तेजी से बनाया गया। यह आंकड़ा करीब 100 करोड़ हाथियों के वजन के बराबर है।
गौर करने वाली बात ये है कि प्लास्टिक को कचरे के तौर पर फेंकने से पहले उसका इस्तेमाल बेहद कम समय के लिए ही किया जाता है।
कुल प्लास्टिक उत्पादन का 70 फीसदी से ज्यादा कचरे के रूप में है, जो अधिकतर ज़मीनों में भरा जा रहा है या नालों में बहाया जा रहा है। इससे वातावरण को भी बहुत नुकसान हो रहा है।
अगर हम पृथ्वी को प्लास्टिक प्लानेट बनने से रोकना चाहते हैं तो हमें प्लास्टिक से बनी चीजों के इस्तेमाल को लेकर सोचना होगा।

18 सितम्बर 2019 करेंट अफेयर्स - एक पंक्ति का ज्ञान One Liner Current Affairs

दिन विशेष विश्व बांस दिवस -  18 सितंबर रक्षा 16 सितंबर 2019 को Su-30 MKI द्वारा हवा से हवा में मार सकने वाले इस प्रक्षेपास्त्र का सफल परी...